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RJD नेताओं के विवादित बयानबाजी का सिलसिला जारी, पूर्व विधायक बोले- 'बाहर से आए ब्राह्मण...उन्हें भगा देना चाहिए'

Bihar Brahmin Controversy: बिहार में राजद नेताओं के विवादित बयानों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रय सचिव और पूर्व विधायक यदुवंश कुमार यादव ने ब्राह्मणों को लेकर विवादित बयान दिया है। राजद नेता के इस बयान के बाद से बिहार की सियासत में गरमागर्मी तेज हो गई है। 

दरअसल सुपौल में राजद कार्यकर्ताओं की एक बैठक थी। इस बैठक को संबोधित करते हुए राजद नेता यदुवंश कुमार यादव ने कहा, "ब्राह्मण रूस और अन्य यूरोपीय देशों के निवासी हैं और भारत आकर बस गए हैं। यादव समाज मूल रुप से भारत का है। कोई ब्राह्मण इस देश का नहीं है। ब्राह्मण विभाजित कर शासन करने की कोशिश कर रहे हैं। हमें उन्हें यहां से भगा देना चाहिए।"

राजद पर भड़की जदयू
बिहार के महागठबंधन सरकार की राजद नेता के इस बयान पर जदयू भड़क गई। जदयू प्रवक्ता अभिषेक झा ने कहा, "राजद नेता मीडिया में बने रहने ते लिए इस तरह की अनर्गल बातें करते हैं। क्या परशुराम रूस से आए थे? ऐसी घटिया टिप्पणी वो सिर्फ मीडिया में आने के लिए करते हैं। राजद को ऐसे नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। ऐसे नेता महागठबंधन की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं।"

इससे पहले रामचरितमानस पर दिया था विवादित बयान
बिहार के शिक्षामंत्री चंद्रशेखर ने रामचरितमानस के बारे में अपमानजनक शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा था, "रामचरितमानस नफरत फैलाने वाला ग्रंथ है। नीच जातियों को रामचरितमानस में जहरीला बताया गया। मनु स्मृति, रामचरित मानस और बंच ऑफ थॉट्स नफरत फैलाने वाला ग्रंथ है।"

चंद्रशेखर सिंह ने रिपब्लिक से बात करते हुए भी यही कहा। वो बोले- "उस ग्रंथ में नफरत का अंश है। जिन लोगों ने इसे नहीं पढ़ा है वहीं बोल रहे हैं कि ये गलत है। संतो की पृष्ठभूमि देखिए कि कौन से लोग इसका विरोध कर रहे हैं। क्या वो संत रैदास हैं, क्या वो पासवान हैं क्या वो गुप्ता हैं क्या वो संत चौधरी हैं क्या वो संत शर्मा हैं? मैंने जो भी कहा वो संपूर्ण ग्रंथ पर टिप्पणी नहीं है।"

आगे उन्होंने कहा कि "बाबा साहेब अंबेदकर ने मनुस्मृति का दहन क्यों किया? ईश्वर किसी जाति के दास नहीं हैं। अगर जाति के दास होते तो रुढ़ीवादियों और दकियानूसी विचारों द्वारा बाबा साबह अंबेदकर को वंचित समाज में पैदा किया गया। भगवान राम को सबरी का जूठा क्यों खाना पड़ा? ये दर्शन है कि जाति के नाम पर विषमा और नफरत का अंश है उसे हटाओ। मैं सीधी बात कहता हूं कि रामचरितमानस हो या मनुस्मृति हो इसमे जातियों के लेकर जो विषमता दिखाई गई है उसे हटाना चाहिए।"

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