बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा (BJP national president JP Nadda) ने सोमवार को बेंगलुरु में पार्टी का 'विजन डॉक्यूमेंट' जारी किया। इस मौके पर राज्य के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई (Basavaraj Bommai) और पूर्व सीएम बीएस येदयुरप्पा (BS Yediyurappa) समेत कर्नाटक बीजेपी के दिग्गज नेता मौजूद रहे।
बीजेपी के घोषणापत्र की बड़ी बातें
एक उच्च-स्तरीय कमेटी की सिफारिशों के आधार पर कर्नाटक में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू करेंगे।
कर्नाटक में एनआरसी को लाएंगे और राज्य में सभी एनआरसी अवैध प्रवासियों के शीघ्र निर्वासन को सुनिश्चित करेंगे।
धार्मिक कट्टरवाद और आतंक के खिलाफ स्पेशल विंग बनाएंगे।
सभी बीपीएल परिवारों को सालाना 3 मुफ्त रसोई गैस सिलेंडर देंगे।
राज्य में पोषण योजना शुरू की जाएगी, जिसमें प्रत्येक बीपीएल परिवार को हर दिन आधा लीटर नंदिनी दूध और 5 किलो श्री अन्न- राशन किट दिया जाएगा।
प्रत्येक जिले में औद्योगिक क्लस्टर स्थापित करेंगे।
पीपीपी मॉडल में हुबली, बेलागवी, कलबुर्गी मैसूरु, मंगलुरु, तुमकुरु और दावणगेरे में कामकाजी महिलाओं और छात्राओं के लिए छात्रावास स्थापित करेंगे।
प्रत्येक गर्भवती महिला को 'सुरक्षा जननी किट' देंगे, जिसमें 6 पोषण किट और 21,000 की वित्तीय सहायता शामिल है।
पीपीपी मॉडल के माध्यम से सभी औद्योगिक समूहों और निर्माण स्थलों पर शिशु विहार स्थापित करेंगे।
सिद्धारमैया पर जेपी नड्डा का हमला
बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि जब बीएस येदियुरप्पा जी ने यहां की सत्ता संभाली और बाद में बोम्मई जी ने जारी रखा, तो मैं कह सकता हूं कि बीजेपी सरकार ने आपदा को अवसर में बदल दिया। इसी कारण कर्नाटक 1 ट्रिलियन इकोनॉमी तक पहुंच गया है। सिद्धारमैया की सरकार के दौरान प्राकृतिक संसाधन को लूटा जा रहा था और अपराधियों को भागने दिया गया और वोट बैंक के लिए राजनीति की जा रही थी।
6 लाख लोगों से सुझाव लिए गए: BJP
बीजेपी ने सुधाकर को मेनिफेस्टो बनाने का कार्यभार सौंपा था। भगवंत खुबा और शोभा करंदलाजे भी घोषणापत्र टीम का हिस्सा रहे। बीजेपी का कहना है कि हमारा मेनिफेस्टो आम आदमी की राय के आधार पर बना है। इन सभी सुझावों को हमने माना है और अगले 25 सालों को ध्यान में रखते हुए घोषणापत्र बनाया है। पार्टी के मुताबिक, 170 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में 6 लाख से अधिक लोगों की राय और सुझाव लिए गए और यह घोषणापत्र तैयार किया गया। पार्टी के मुताबिक, घोषणापत्र तैयार करने में मदद करने में 17 राष्ट्रीय नेताओं का भी हाथ था।
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