Advertisement

ads header

40 हजार सोने की खदानों पर कब्जे के लिए खूनी संघर्ष! जानिए Sudan के सुलगने की असली कहानी

Sudan Crisis: दुनिया का सबसे गरीब देश गृह युद्ध की आग में जल रहा है जिसकी कमान सेना के दो कमांडरों ने संभाल रखी है। पिछले लगभग दो हफ्तों से देश की राजधानी खार्तूम दहक रही है। वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि ये दो कमांडर देश के अकूत सोने के भंडार पर कब्जा जमाना चाहते हैं। इनकी सनक अफ्रीकी महाद्वीप के तीसरे बड़े देश को तबाह कर रही है। इनकी जिद्द से दुनिया परेशान है।

अमेरिका, ब्रिटेन, भारत जैसे तमाम बड़े देश अपने नागरिकों को बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं। भारत का ऑपेरशन कावेरी इसका ही प्रतिफल है। अपने देशवासियों को बचाने के लिए भारतीय वायुसेना का सी130 मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट से लेकर नौसना के जहाज तक को पहुंचना पड़ा।

इसका भूगोल समझते हैं
सूडान का आधिकारिक नाम रिपब्लिक ऑफ सूडान है। इसके दक्षिण पश्चिम में सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक और पश्चिम में चाड है। तो उत्तर में इजिप्ट है वहीं उत्तर पूर्व में एरिट्रिया है। इसके उत्तर पश्चिम में लीबिया है। दक्षिण पूर्व में इथियोपिया है। इस देश के दक्षिण में दक्षिणी सूडान और पूरब में लाल सागर है। मानचित्र या फिर ग्लोब पर देखें तो स्पष्ट होगा कि इसके पूर्व में पानी है और बाकी तीन तरफ ये जमीन से घिरा है। 

इतिहास क्या है?
2021 के तख्तापलट के बाद सूडान में काउंसिल ऑफ जनरल सरकार चला रहे हैं। सेना की ओर से सरकार चलाने के लिए ट्रांजिशनल मिलिट्री काउंसिल यानी टीएमसी बनाई गई थी। प्रदर्शकारियों की ओर से फोर्सेज ऑफ फ्रीडम ऐंड चेंज यानी कि एफएफसी बनाई गई थी। दोनों के बीच लिखित समझौता हुआ था। दोनों की ओर से पांच-पांच लोगों का चयन किया गया था, जिन्हें मिलकर सूडान की सत्ता चलानी थी। दोनों ने मिलकर अबदल्ला हैमडॉक का नाम तय किया।

सत्ता पर दो मिलिट्री मैन काबिज हैं। जनरल अब्देल फतह-अल- बुरहान जो सैन्य कमांडर हैं वो देश के नए मुखिया बन गए और दूसरे जनरल मोहम्मद हमदान दगालो हेमदाती जिनके हाथों में अर्द्धसैनिक बल RSF की कमान है। उन्हें सेना का डिप्टी कमांडर बनाया गया।दोनों ने मिलकर तय किया कि वो सूडान की सत्ता पर तब तक काबिज रहेंगे, जब तक सूडान में नए सिरे से चुनाव न हो जाएं। लेकिन सेना ने समझौते को एक साल बीतते-बीतते तोड़ दिया। अक्टूबर 2021 में सूडान की मिलिट्री ने अबदल्ला हैमडॉक की सरकार को बर्खास्त कर दिया और सत्ता अपने हाथ में ले ली। बस यहीं से सत्ता की जंग शुरू हो गई। 

रेपिड सपोर्ट फोर्सेस
RSF 2013 में बनी। दरअसल, ये बेहद खतरनाक जंजावीड़ मिलेशिया था जो अपनी निरंकुशता के लिए कुख्यात था। ये लोग जातीय संहार के लिए पहचाने जाते थे। फिर पैरामिलिट्री में शामिल किया और RSF का नाम दे दिया गया। 2019 में RSF ने 120 प्रदर्शनकारियों को मौत के घाट उतार दिया था। तब से दगालो ने एक शक्तिशाली फोर्स बनाया जिसने यमन और लीबिया के बीच हुए टकराव में हिस्सा लिया। धीरे धीरे दगालो का economic interest बढ़ा और नजर सूडान की सोने की खदानों पर जाकर टिक गई।

जिसके बाद दागलो ने रैपिड सपोर्ट फोर्स के करीब 10 हजार जवानों को सूडानी सेना में भर्ती कराने का प्रस्ताव रखा। ये भी कहा कि सेना को अगले 10 साल तक सूडान पर अपना कब्जा बनाए रखना चाहिए.लेकिन जनरल अब्देल फतह अल बुरहान नहीं माने और डाग्लो के इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया।

40 हजार खदानों की जंग
दोनों की निगाहें 40 हजार सोने की खदानों पर हैं। जो जिसके पास होंगी वो अमीर होगा, खजाने का मालिक होगा और ताकतवर होगा। क्योंकि सोना डॉलर में बिकता है और डॉलर को हथियार खरीदने में इस्तेमाल किया जाता है। दागलो ने मौके पर रैपिड सपोर्ट फोर्स को पूरे देश में तैनात कर दिया। बुरहान ने इसे देश में पैरामिलिट्री का हस्तक्षेप माना। नतीजतन सूडान की आर्मी और पैरामिलिट्री फोर्स आमने-सामने आ गईं। अब दोनों के बीच जंग जारी है। दोनों के पास खतरनाक हथियार हैं और दोनों एक दूसरे के खिलाफ इसका प्रयोग कर रहे हैं। जिसकी जद में आम सिविलियन्स भी आ रहे हैं।

दुनिया बेहाल
दो सत्ता लोभियों की जंग में पूरी दुनिया परेशान हो रही है। सूडान में अमेरिकी, फ्रेंच, ब्रिटिश और भारतीय भी रहते हैं। सबको अपने नागरिकों की फिक्र है और इन्हें निकालने की कोशिश दुनिया कर रही है। नागरिकों को निकलवाने में मदद सऊदी अरब कर रहा है, क्योंकि लाल सागर (सूडान से लगा) के उस पार सऊदी अरब है। भारत ने भी सूडान में फंसे करीब चार हजार लोगों को वहां से बाहर निकालने के लिए ऑपरेशन कावेरी नाम दिया है। अब तक करीब 3000 भारतीयों को निकाल लिया गया है।

Post a Comment

0 Comments