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मृत्यु का पता नहीं, मगर श्रेष्ठ जीवन पूरी कविता पढ़ने के लिए लिंक पर क्लिक करें

शेष है

मृत्यु का पता नहीं
मगर श्रेष्ठ  जीवन
अभी शेष है।
नफ़रत का पता नहीं 
मगर मोहब्बत की अभिलाषा
अभी शेष है।
आत्मसमर्पण का पता नहीं 
मगर आत्मबलिदान का बोध 
अभी शेष है।
मन में पनपते क्रोध का पता नहीं 
मगर ह्रदय के आँचल में शांति
अभी शेष है।
आत्मग्लानि का पता नहीं
मगर आत्म साक्षातकार का बोध
अभी शेष है।
जीवन में लगी ठोकरओं का पता नहीं 
मगर खड़े होकर मार्ग पर चलना
अभी शेष है।

राजीव डोगरा
(भाषा अध्यापक)
राजकीय उत्कृष्ट वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय
गाहलिया 
पता-गांव जनयानकड़
पिन कोड -176038
कांगड़ा हिमाचल प्रदेश
9876777233
rajivdogra1@gmail.com
मौलिकता प्रमाण पत्र
मेरे द्वारा भेजी रचना मौलिक तथा स्वयं रचित जो कहीं से भी कॉपी पेस्ट नहीं है।

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